महाकाव्य महाभारत की 4 ऐसी कहानियां जिनके बारे में आपको शायद ही पता होगा!

Editorial Team
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महाभारत भारत का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है, जो स्मृति के इतिहास वर्ग में आता है। इसे भारत भी कहा जाता है। यह काव्यग्रंथ भारत का अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ हैं। विश्व का सबसे लंबा यह साहित्यिक ग्रंथ और महाकाव्य, हिन्दू धर्म के मुख्यतम ग्रंथों में से एक है जिसकी रचना महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास जी ने की थी। कृष्णद्वैपायन वेदव्यास महर्षि पराशर और सत्यवती निषाद के पुत्र थे| महाभारत ग्रंथ का लेखन भगवान् गणेश ने महर्षि वेदव्यास निषाद से सुन सुनकर किया था। ऐसा माना जाता है कि वेदव्यास जी महाभारत के रचयिता ही नहीं, बल्कि उन घटनाओं के साक्षी भी रहे हैं, जो क्रमानुसार घटित हुई हैं।

महाभारत के बारे में कई कहानियाँ हैं जिनसे आप परिचित होने की संभावना है, लेकिन कई अन्य ऐसी भी हैं जिनके बारे में आप शायद ज्यादा नहीं जानते हैं।आइये पवित्र ग्रन्थ महाभारत से जुड़ी इनमें से कुछ कहानियों के बारे में जानें।

1.जब कौरव सेना पांडवों से युद्ध हार रही थी, तब दुर्योधन भीष्म पितामह के पास गया और उनसे कहा कि आप इस युद्ध को पूरी ताकत से नहीं लड़ रहे हो। भीष्म पितामह को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने तुरंत पाँच स्वर्ण बाण लिए और कुछ मंत्र पढ़े। मंत्र पढ़कर उन्होंने दुर्योधन से कहा कि कल वह इन पांच बाणों से पांडवों का वध कर देंगे । लेकिन दुर्योधन ने भीष्म पितामह पर विश्वास नहीं किया और तीर ले लिया और कहा कि वह इन तीरों को कल सुबह वापस कर देगा।

इन तीरों के पीछे की कहानी भी बहुत मजेदार है। भगवान कृष्ण को जब तीरों के बारे में पता चला तो उन्होंने अर्जुन को बुलाया और कहा कि तुम दुर्योधन के पास जाओ और पांचो तीर मांग लो। दुर्योधन की जान तुमने एक बार गंधर्व से बचायी थी।इसके बदले उसने कहा था कि कोई एक चीज जान बचाने के लिए मांग लो। समय आ गया है कि अभी तुम उन पांच सोने के तीर मांग लो। अर्जुन दुर्योधन के पास गया और उसने तीर मांगे. क्षत्रिय होने के नाते दुर्योधन ने अपने वचन को पूरा किया और तीर अर्जुन को दे दिए।

2. द्रोणाचार्य को भारत का पहले टेस्ट ट्यूब बेबी माना जा सकता है। यह कहानी भी काफी रोचक है। द्रोणाचार्य के पिता महर्षि भारद्वाज थे और उनकी माता एक अप्सरा। दरअसल, एक शाम भारद्वाज शाम में गंगा नहाने गए तभी उन्हें वहां एक अप्सरा नहाती हुई दिखाई दी। उसकी सुंदरता को देख ऋषि मंत्र मुग्ध हो गए और उनके शरीर से शुक्राणु निकला जिसे ऋषि ने एक मिट्टी के बर्तन में जमा करके अंधेरे में रख दिया।इसी से द्रोणाचार्य का जन्म हुआ.

3. जब पांडवों के पिता पांडु मरने के करीब थे तो उन्होंने अपने पुत्रों से कहा कि बुद्धिमान बनने और ज्ञान हासिल करने के लिए वे उनका मस्तिष्क खा जाएं। लेकिन पाँचों पाण्डवों में सिर्फ़ सहदेव ने उनकी इच्छा पूरी की और उनके मस्तिष्क को खा लिया। पहली बार खाने पर उसे दुनिया में हो चुकी चीजों के बारे में जानकारी मिली। दूसरी बार खाने पर उसने वर्तमान में घट रही चीजों के बारे में जाना और तीसरी बार खाने पर उसे भविष्य में क्या होनेवाला है, इसकी जानकारी मिली।

4. अभिमन्यु की पत्नी वत्सला बलराम की बेटी थी. बलराम चाहते थे कि वत्सला की शादी दुर्योधन के बेटे लक्ष्मण से हो. वत्सला और अभिमन्यु एक-दूसरे से प्यार करते थे. अभिमन्यु ने वत्सला को पाने के लिए घटोत्कच की मदद ली. घटोत्कच ने लक्ष्मण को इतना डराया कि उसने कसम खा ली कि वह पूरी जिंदगी शादी नहीं करेगा.

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