भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी कहते हैं, इसे अनंत चौदस भी कहते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु, माता यमुना और शेषनाग की पूजा की जाती है और इस दिन अनंत सूत्र बांधा जाता है। इसी दिन गणेश उत्सव का समापन भी होता है। अनंत चतुर्दशी के दिन अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है। अनंत सूत्र के संबंध में मान्यता है कि इस सूत्र में भगवान विष्णु का वास होता है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद अनंत सूत्र को भुजा पर बांधा जाता है। अनंत सूत्र में 14 गांठें होनी चाहिए, ये 14 गांठें 14 लोकों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करने का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन भगवान विष्णु के भक्त दिन भर का उपवास रखते हैं।
हिन्दू धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशिष्ट स्थान है। यह त्योहार भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन दो महत्वपूर्ण घटनाएं होती हैं: भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा और गणेशोत्सव का समापन (गणेश विसर्जन)। अर्थात यह दिन दुगना पवित्र और भावपूर्ण होता है।
तिथि और शुभ मुहूर्त
- तिथि: शनिवार, 6 सितंबर 2025 यह पर्व आता है।
- चतुर्दशी तिथि आरंभ: 6 सितंबर को सुबह लगभग 3:12 बजे से
- तिथि समाप्ति: 7 सितंबर को लगभग 1:41 बजे तक
- पूजा मुहूर्त: लगभग सुबह 6:02 बजे से मध्यरात्रि 1:41 बजे तक का समय शुभ माना गया है
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
1. विष्णु के अनंत रूप की उपासना
“अनंत” का अर्थ है – ‘अनंत, अथाह और व्यापक।’ इस दिन भगवान विष्णु की अनंत स्वरूप पूजा की जाती है। इसे करने से जीवन पर ब्रह्मांडीय संरक्षा, शांति और रक्षा की कृपा मानी जाती है।

2. गणेशोत्सव का समापन
अनंत चतुर्दशी पर गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाता है। यह पुण्यप्रद व भावनात्मक क्षण होता है जहां भक्त ‘गणपति बप्पा मोरया’ के स्वर के साथ उन्हें विदा करते हैं। यह जीवन की अंतर्निहित अस्थिरता को स्वीकार करने और नवोदय की आशा का प्रतीक है।
पूजा विधि: कैसे करें अनंत चतुर्दशी का अनुष्ठान?
- सुबह जल्दी उठें, स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- घर के मंदिर को स्वच्छ करें, चौकी पर लाल/पीला वस्त्र बिछाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
- अनंत सूत्र: यह एक पवित्र धागा होता है, जिसमें 14 गांठें होती हैं-ये 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं। पूजा के बाद पुरुष इसे दाईं बांह पर, महिलाएं बाईं बांह पर बाँधती हैं।
- षोडशोपचार विधि से पूजा (पीले फूल, चंदन, दीप, अक्षत, धूप आदि से) करें, फिर विष्णु सहस्रनाम या अन्य मंत्रों का पाठ करें और आरती करें।
- गणेश विसर्जन: विसर्जन से पहले गणपति की आरती करें, मोदक आदि भोग लगाएं, फिर मन, श्रद्धा और भाव से उन्हें जल में विसर्जित करें।
पौराणिक कथा: अनंत चतुर्दशी का प्रेरणादायक इतिहास
महाभारत में वर्णित एक कथा है, जिसमें रिषि कौंडिल्य की पत्नी सुशीला अनंत चतुर्दशी का व्रत विधिपूर्वक करती थीं। उसी दिन वे एक अनंत सूत्र धारण करती हैं। उनके जीवन में समृद्धि आती है। परंतु जब कौंडिल्य ने उस सूत्र को आग में फेंक दिया तो विपत्ति आने लगती है। तब अनंत (विष्णु) प्रकट होते हैं और उन्हें इस व्रत को चौदह वर्षों तक करने का निर्देश देते हैं। इससे उन्होंने फिर से समृद्धि और स्थिरता प्राप्त की।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| तिथि | 6 सितंबर 2025 (शुक्र उदय: 03:12 बजे, समापन: 01:41 बजे) |
| पूजा मुहूर्त | सुबह 6:02 बजे से मध्यरात्रि तक |
| मुख्य पूजा विधियाँ | अनंत सूत्र बाँधना, विष्णु पूजा, गणेश विसर्जन |
| आध्यात्मिक लाभ | समृद्धि, जीवन संतुलन, मोक्ष और शुभ फल |
| पौराणिक कथा | सुशीला-व्रत कथा (कौंडिल्य परिवार) |