हिंदू धर्म में पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) का अत्यंत महत्व है- जब हम अपने पूर्वजों की आत्माओं को सम्मान व शांति प्रदान करने हेतु श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। यह धर्म-कर्म का समय है, जब घर को पूर्णतया पवित्र और सौम्य बनाए रखना आवश्यक माना जाता है। इस दौरान कुछ वस्तुओं का घर में होना पितरों की नाराज़गी और अशुभ प्रभावों का कारण बन सकता है।
यह वह अवधि है जब हिंदू अपने पूर्वजों के लिए प्रार्थना करते हैं, विशेष रूप से प्रार्थना अनुष्ठान के माध्यम से।
परिवार की दिवंगत आत्माओं को भोजन और जल अर्पित करना, जिसे श्राद्ध कहते हैं।
चंद्र दिवस के एक पखवाड़े तक चलने वाले पितृ पक्ष को पितृ पक्ष, पितृ पोक्खो, कनागत, जितिया, महालय पक्ष, अपरा पक्ष और सोलह श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है। यह दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार, भाद्रपद के चंद्र माह में पूर्णिमा या पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होकर मनाया जाता है।
भारतीय अमावस्या कैलेंडर और उत्तर भारतीय पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार, अश्विन के चंद्र माह में भाद्रपद की पूर्णिमा या पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होकर मनाया जाता है।
दोनों कैलेंडर के अनुसार अनुष्ठान एक ही हैं, अर्थात् पूर्वजों को श्राद्ध अर्पित करना। पितृ पक्ष तब शुभ हो जाता है जब मृत्यु संस्कार, जिसे श्राद्ध या तर्पण कहा जाता है, इस समारोह के दौरान किया जाता है।
इस अवधि के दौरान सूर्य उत्तरी से दक्षिणी गोलार्ध की ओर यात्रा करता है।
आइए जानें, कौन-सी तीन प्रमुख चीज़ें हैं जिन्हें पितृपक्ष में घर में रखना वर्जित है, और क्यों इन्हें बचकर रहना ज़रूरी है।
1. टूटे-फूटे बर्तन
शास्त्र अनुसार, पितृपक्ष शुरू होने से पहले घर से टूटे-फूटे बर्तन अवश्य हटा दूँ।
ये बर्तन नकारात्मकता और अपवित्रता के प्रतीक माने जाते हैं। जब पितर धरती पर वास करते हैं, तो इन्हें सम्मान से ग्रहण करना चाहिए- और टूटे बर्तन उस ग्रहण की गरिमा को धूमिल कर देते हैं। इस कारण इन्हें तुरंत हटाकर उचित तरीके से निपटाना चाहिए।
2. खंडित मूर्तियाँ या तस्वीरें
अगर घर में किसी देवी-देवता की खंडित मूर्ति या फटी तस्वीर है, तो उसे सुरक्षित स्थान पर रख दें या किसी पवित्र स्थान पर छोड़ दें।
ध्यातव्य है कि पितृपक्ष में पितरों का आगमन और गृह में वास होता है। इस वातावरण में अधूरे या टूटे धार्मिक प्रतीक अशुभ धारणाएं उत्पन्न कर सकते हैं। इसलिए ऐसे धार्मिक संबंधी खंडित वस्तुओं को घर में रखना वर्जित है।
3. बंद या टूटी हुई घड़ी
टूटी या बंद पड़ी घड़ी को घर से अवश्य हटा दें।
घड़ी जीवन की प्रगति, समय और गति की प्रतीक है। यदि वह रुक गई है, तो यह घर में स्थिरता और बाधा का संकेत माना जाता है। पितृपक्ष की पवित्र अवधि में यह उम्मीद है कि जीवन की सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे-ऐसी प्रतीकात्मक बाधा रोड़ा बन सकती है।

क्यों इन तीन चीज़ों से दूर रहें?
पितृपक्ष में पितरों की आत्माएँ धरती पर आती हैं, और उनके आशीर्वाद के लिए पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य माना जाता है। टूटे-फूटे वस्त्र या धार्मिक प्रतीक अशुभ संकेतिक और मानसिक अशांति की वजह बनते हैं। घर में सक्रिय रूप से सकारात्मकऔर सम्मानपूर्ण ऊर्जा बनाए रखना चाहिए, जिससे पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता रहे।
अन्य सामान्य वर्जित कार्यों का संक्षिप्त उल्लेख
जबकि हमारा उद्देश्य तीन प्रमुख वर्जित चीज़ों पर केंद्रित है, यहाँ कुछ अन्य महत्वपूर्ण “क्या न करें” नियम भी सरल रूप में उल्लेखनीय हैं:
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मांसाहार, तामसिक पदार्थ, शराब या नशे वाली वस्तुएँ – पितृपक्ष में पूरी तरह से वर्जित मानी जाती हैं।
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बाल/नाखून काटना, झूठ बोलना, वाद-विवाद, क्रोध, नए रिश्ते या शुभ कार्य आरंभ करना – इनसे पितरों की नाराज़गी होती है।
Pitru Paksha 2025 में यदि आप निम्नलिखित तीन चीज़ें घर से अवश्य हटा दें-तो आप पितरों की नाराज़गी से बचकर, श्रद्धा से अपने श्राद्ध कर्म को पूरी कर सकते हैं:
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टूटे-फूटे बर्तन
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खंडित मूर्तियाँ या तस्वीरें
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बंद या टूटी हुई घड़ी
इनके अलावा संयमित जीवनशैली, सात्विक भोजन और सही शाश्र्त्रीय विधियों का पालन कर आप पितृपक्ष के इस पवित्र समय में अपने पूर्वजों की आत्मा को संतुष्ट कर सकते हैं।