Nag Panchami 2025: नाग पंचमी कब मनाई जा रही है ,जानिए पूजा के शुभ मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में

Editorial Team
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हिंदू धर्म में नाग पंचमी पर्व को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. यह पर्व प्रत्येक वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर नाग देवता की उपासना करने से और दान-पुण्य करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है. वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष नाग पंचमी पर्व आज यानी 09 अगस्त 2024, शुक्रवार के दिन मनाया जा रहा है. मान्यता है कि आज के दिन शुभ मुहूर्त में नाग देवता की विधिवत पूजा करने से व्यक्ति को सभी सुखों की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं, पूजा विधि और मंत्र.

नाग पंचमी 2025 तिथि व मुहूर्त
नाग पंचमी July 29, 2025, Tuesday को है।
नाग पंचमी पूजा मूहूर्त 05:29 AM to 08:11 AM तक रहेगा।
नाग पंचमी तिथि July 29, 2025 को 11:24 PM से Jul 30, 2025 को12:46 AM तक रहेगी।
बता दें गुजरात में नाग पंचमी August 13, 2025 को मनाई जाएगी।

नाग पंचमी का महत्व
यह दिन नाग देवता के लिए समर्पित है. पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत में राजा जनमेय ने अपने पिता का बदला लेने के लिए एक यज्ञ का आरंभ किया था. ये यज्ञ सांपों के अस्तित्व को मिटाने के लिए किया गया था. इस दौरान ऋषि आस्तिक ने इस यज्ञ को रोका और सांपों को बचाया. यह दिन सावन की शुक्ल पक्ष की पंचमी का दिन था और तब से ही नाग पंचमी के रूप में इसे मनाया जाने लगा.

इस दिन लोग मंदिर जाते हैं और नाग देवता की पूजा करते हैं. उन्हें दूध, चावल, फूल और मिठाई आदि अर्पित करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस पूजा से नागदेव के साथ भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं और सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

नाग पंचमी पूजा विधि
नाग पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त यानी तड़के सुबह जगकर स्नान कराना चाहिए। देवी-देवताओं का ध्यान करना चाहिए। साफ सुथरे कपड़ें पहननी चाहिए। सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए। घर के मंदिर की साफ-सफाई करनी चाहिए और गंगाजल का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद किसी दीवार पर नाग देवता की तस्वीर लगाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। नाग देवता को रोली, चंदन, चावल आदि अर्पित करना चाहिए। इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर आरती करनी चाहिए। नाग देवता को दूध चढ़ाना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

नाग स्तोत्र
ब्रह्म लोके च ये सर्पाः शेषनागाः पुरोगमा।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

विष्णु लोके च ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाश्चये।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

रुद्र लोके च ये सर्पाः तक्षकः प्रमुखास्तथा।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

खाण्डवस्य तथा दाहे स्वर्गन्च ये च समाश्रिता।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

सर्प सत्रे च ये सर्पाः अस्थिकेनाभि रक्षिता।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

प्रलये चैव ये सर्पाः कार्कोट प्रमुखाश्चये।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

धर्म लोके च ये सर्पाः वैतरण्यां समाश्रिता।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

ये सर्पाः पर्वत येषु धारि सन्धिषु संस्थिता।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पाः प्रचरन्ति च।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

पृथिव्याम् चैव ये सर्पाः ये सर्पाः बिल संस्थिता।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

रसातले च ये सर्पाः अनन्तादि महाबला।
नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा।।

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