ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को बड़ा मंगल क्यों कहा जाता है, जानें इसकी कहानी और महत्व

Editorial Team
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हिंदू धर्म शास्त्रों में प्रत्येक दिन का अपना अलग महत्व है और हर एक दिन किसी न किसी भगवान की पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि यदि प्रत्येक दिन में ईश्वर की भक्ति की जाती है तो पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

उन्हीं शास्त्रों में मंगलवार के दिन को भगवान हनुमान को समर्पित माना गया है और इस दिन को हनुमान भक्ति लीन होने का अलग महत्व बताया गया है। लेकिन ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाले सभी मंगलों को बड़ा मंगल कहा जाता है और इनमें विशेष रूप से राम भक्त हनुमान की पूजा की जाती है। आइए जानें कि बड़ा मंगल की कहानी क्या है, इसका महत्व क्या है और इसकी शुरुआत कहां से हुई थी।

ज्येष्ठ महीने में बड़ा मंगल क्यों मनाते हैं

सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी भगवान राम से पहली बार प्रभु श्री राम पहली बार ज्येष्ठ महीने के मंगलवार के दिन ही मिले थे। तभी से यह मान्यता है कि इस महीने के सभी मंगलवार के दिनों को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है। इस ख़ास दिन में मंदिरों में कीर्तन होते हैं, भक्तों के लिए भंडारे होते हैं और जगह-जगह पर प्याऊ लगवाए जाते हैं। दरअसल बड़ा मंगल उत्तर प्रदेश के लखनऊ में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और ऐसी मान्यता है कि इसकी शुरुआत भी यहीं से हुई थी।

इस साल कब से शुरू हुआ है बड़ा मंगल
इस साल ज्येष्ठ माह की शुरुआत 13 मई 2025 से हुई हैऔर यह 10 जून 2025 तक समाप्त होगा। पंडितों के अनुसार इस साल बड़े मंगल की तिथियां 13 मई, 20 मई , 27 मई, 3 जून और 10 जून हैं।

बड़ा मंगल का इतिहास
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बड़ा मंगल लखनऊ का एक अनोखा त्योहार है क्योंकि यह किसी अन्य राज्य या शहर में नहीं मनाया जाता है। यह पर्व लखनऊ (लखनऊ के बारे में कितना जानते हैं आप)की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक माना जाता है और कहा जाता है कि इसकी शुरुआत लगभग 400 साल पहले मुगल शासन के दौरान हुई थी।

बड़े मंगलवार को हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्म के लोग बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। इसकी कहानी के अनुसार एक बार नवाब मोहम्मद अली शाह के पुत्र बहुत बीमार पड़ गए। तब उनकी पत्नी ने अपने पुत्र का इलाज कई जगह करवाया परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। इसके पश्चात लोगों ने उनकी पत्नी को अपने पुत्र की कुशलता के लिए लखनऊ के अलीगंज में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में जाने और वहां हनुमान जी की पूजा करते हुए मन्नत मांगने की सलाह दी। नवाब ने वैसा ही किया और उनका बेटा भी पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया। इसके बाद नवाब और उनकी पत्नी ने हनुमान मंदिर की मरम्मत करवाई। मंदिर की मरम्मत का काम पूरा होने के बाद ज्येष्ठ महीने के हर मंगलवार को शहर वासियों को पानी और गुड़ का शर्बत बांटा गया। तभी से बड़े मंगल की शुरुआत हुई।

 

बड़े मंगल का महत्व
बड़े मंगल को बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है और ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान हनुमान की पूजाकरने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। बड़े मंगलवार के दिन लखनऊ के अलीगंज हनुमान मंदिर समेत अन्य मंदिरों में भी भंडारे का आयोजन होता है। ऐसी मान्यता है कि इस माह के मंगलवारों को जो भक्त हनुमान जी की पूजा और व्रत करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन पूजन करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और घर में खुशहाली आती है।

बड़ा मंगल कैसे मनाया जाता है
ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ महीने के मंगवार के दिन भक्त जन मंदिरों में भंडारा कराते हैं। हलवा-पूरी, आलू-कचौरी, छोला-चवाल, कढ़ी चावल से लेकर जूस तक भंडारे में कई तरह का स्वादिष्ट प्रसाद बांटा जाता है। ज्येष्ठ के महीने में 4 या 5 मंगलवार होते हैं जिनमें सुंदरकांड का पाठ करना फलदायी माना जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा का विधान है, लेकिन यदि आप मंदिर नहीं जा पाते हैं तब भी घर पर ही हनुमान जी का पूजन करें। ऐसा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

यदि आप भी भक्ति में लीन होकर हनुमान जी की पूजा करना चाहते हैं तो बड़ा मंगल का दिन आ पके लिए अत्यंत शुभ है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

 

पौराणिक कथा के अनुसार
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल रामायण काल से भी जुड़ा हुआ माना जाता है. रामायण काल में एक बार सीता माता को खोजते हुए जब हनुमानजी लंका पहुंचे तो रावण ने हनुमान जी को बंदर कहकर उनका अपमान किया. रावण के घमंड को चकनाचूर करने के लिए भी हनुमानजी ने वृद्ध वानर का रूप धारण किया था और अपनी पूंछ से लंका को जलाकर लंकापति रावण का घमंड चकनाचूर किया था

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