Makar Sankranti 2026: 14 या 15 जनवरी, कब है मकर सक्रांति? नोट करें डेट और जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

Editorial Team
7 Min Read
Makar Sankranti 2026

Makar Sankranti 2026  हिंदू संस्कृति का वह त्योहार है जिसे पूरे भारत में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को दर्शाता है। जब सूर्य दक्षिणायन को छोड़कर उत्तरायण की ओर बढ़ता है, तब नई ऊर्जा का आरंभ होता है। यह बदलाव केवल खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि अध्यात्म, कृषि, सामाजिक जीवन और प्रकृति सभी पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है।

इस दिन देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ खुशियाँ मनाई जाती हैं। कहीं इसे पोंगल कहा जाता है, कहीं उत्तरायण, कहीं खिचड़ी पर्व। पर अर्थ एक ही—सूर्य की नई दिशा में बढ़ती रोशनी का स्वागत।

2026 में कब है मकर संक्रांति?

वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी।
इस दिन सुबह पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य और सूर्य देव को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति का पौराणिक इतिहास

मकर संक्रांति की कथा उतनी ही प्राचीन है जितना स्वयं वैदिक धर्म। माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर यानी मकर राशि में प्रवेश करते हैं। पौराणिक मान्यता यह भी कहती है कि इसी दिन भीष्म पितामह ने महाभारत युद्ध के बाद इच्छा-मृत्यु का वरण किया था, क्योंकि सूर्य के उत्तरायण होने का समय आत्मा की मुक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

कहानी यह भी बताती है कि देवताओं और असुरों के बीच युद्ध के समय इस संक्रांति काल में देवताओं को विशेष ऊर्जा प्राप्त हुई, जिससे वे विजय हुए। इसलिए इस दिन को सकारात्मकता, शक्ति और प्रकाश का प्रतीक माना गया है।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति का मूल संदेश है—अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा।
सूर्य जब उत्तरायण होता है तो पृथ्वी पर दिन बढ़ने लगते हैं। यह समय आध्यात्मिक साधना, उपवास, दान और पवित्र कर्मों के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

हिंदू धर्मग्रंथों में लिखा है कि इस दिन किया गया दान सौ गुना फल देता है। इसके पीछे कारण है कि सूर्य देव इस समय अपनी ऊर्जा को धरती पर अधिक मात्रा में बरसाते हैं, जिससे प्रकृति में सकारात्मक कंपन बढ़ जाता है। इसी वजह से लाखों श्रद्धालु गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।

क्यों खाया जाता है तिल और गुड़?

तिल और गुड़ मकर संक्रांति का सबसे महत्वपूर्ण व्यंजन है।
इसके पीछे कई कारण हैं।

पहला कारण यह है कि तिल शरीर में गर्माहट पैदा करता है। जनवरी की सर्दी में यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
दूसरा कारण यह कि तिल को पवित्र माना गया है। पुराणों में तिल को पितरों का प्रिय बताया गया है।
गुड़ ऊर्जा देता है और शरीर को शुद्ध करता है। इसलिए तिल-गुड़ का लड्डू इस त्योहार की पहचान बन गया है।

साथ ही, तिल-गुड़ मिठाई देने का अर्थ है—
“मीठे बोल बोलो, कटुता छोड़ो, नई शुरुआत करो।”

भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति

1. उत्तर प्रदेश और बिहार – खिचड़ी पर्व

उत्तर भारत में यह त्योहार खिचड़ी दान, गाय दान, और तिल-गुड़ बांटने के लिए प्रसिद्ध है।
लोग गंगा स्नान करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा होती है।

2. महाराष्ट्र – तिलगुल और हल्दी-कुमकुम

महाराष्ट्र में महिलाएँ एक-दूसरे को हल्दी-कुमकुम लगाती हैं और कहती हैं,
“तिलगुल घ्या, गोड़ गोड़ बोला।”
यानी मीठा खाओ और मीठा बोलो।

Makar Sankranti 2026
Makar Sankranti 2026

3. तमिलनाडु – पोंगल

दक्षिण भारत में यह त्योहार पोंगल के रूप में चार दिनों तक अत्यंत भव्य रूप से मनाया जाता है।
नया चावल और गन्ने से बनने वाला मीठा पोंगल इस मौके का प्रमुख व्यंजन है।

4. गुजरात – उत्तरायण और पतंगबाजी

गुजरात में आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है।
लोग पूरे दिन पतंगबाजी करते हैं और मिलकर भोजन करते हैं।

5. पंजाब – लोहड़ी के बाद माघी

पंजाब में 13 जनवरी को लोहड़ी और अगले दिन माघी मनाई जाती है।
यह दिन खेतों में नई फसलों के आने का संकेत है।

मकर संक्रांति के वैज्ञानिक तथ्य

मकर संक्रांति खगोलीय घटना पर आधारित त्योहार है।
इस दिन सूर्य पृथ्वी के संबंध में अपनी दिशा बदलते हुए भूमध्य रेखा की ओर आगे बढ़ता है। इससे उत्तरी गोलार्ध में दिन बढ़ने और रातें घटने लगती हैं। वैज्ञानिक रूप से भी यह समय ऊर्जा, प्रकाश और मौसम के बदलाव का प्रतीक है।

इसके अलावा, सूर्य का उत्तरायण होना शरीर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है। इसलिए योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना इस समय अधिक प्रभावी मानी जाती है।

मकर संक्रांति पर दान-पुण्य का महत्व

यह त्योहार दान, धर्म और सेवा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
दान करते समय तिल, गुड़, कम्बल, कपड़े, अनाज और पैसे देना विशेष फलदायी माना गया है।
माना जाता है कि इस दिन किया गया दान अगले जन्म तक व्यक्ति को पुण्य प्रदान करता है।

पुनीत नदी में स्नान, सूर्य को जल अर्पित करना, और गरीबों की सेवा करना संक्रांति का मुख्य केंद्र है।

मकर संक्रांति से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराएँ

भारत की विविध संस्कृति इस पर्व को अलग रंग देती है।
कहीं लोग पतंग उड़ाते हैं, कहीं संगीत और नृत्य के कार्यक्रम होते हैं।
कहीं नए चावल का पकवान बनता है, कहीं परिवार के साथ बैठकर तिल-गुड़ बांटा जाता है।

हर जगह यह संदेश एक ही है—
नई शुरुआत करो, कड़वाहट भूलो, और जीवन में प्रकाश लाओ।

मकर संक्रांति केवल त्योहार नहीं है।
यह प्रकृति, अध्यात्म, विज्ञान और मानवीय मूल्यों का संगम है।
यह बताता है कि जीवन में अंधकार हो या ठंड, अंत में सूरज हमेशा लौटता है।
उत्तरायण की यह ऊर्जा जीवन को आगे बढ़ाने, सकारात्मकता अपनाने और नई सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश देती है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *