Dussehra 2025: दशहरा में रावण दहन क्यों होता है ? जानिए कब हुई इस परंपरा की शुरुआत

Editorial Team
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Why is Ravana burnt on Dussehra?

दशहरा जिसे विजया दशमी भी कहा जाता है, 2025 में गुरुवार, 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह दिन अश्विन मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को पड़ता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

 रावण दहन क्यों किया जाता है?

रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

  • रामायण की कथा: रावण ने माता सीता का हरण किया और अंततः भगवान श्रीराम ने उसे युद्ध में पराजित किया।

  • धार्मिक संदेश: रावण का दहन हमें यह याद दिलाता है कि चाहे अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न लगे, अंततः धर्म की विजय होती है।

  • प्रतीकात्मक महत्व: रावण को दस सिरों वाला माना गया है, जो हमारे भीतर की दस बुराइयों जैसे – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, अन्याय और ईर्ष्या का प्रतीक हैं।

रावण दहन की परंपरा की शुरुआत कब हुई?

रावण दहन की परंपरा बहुत पुरानी है लेकिन लिखित और ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि बड़े स्तर पर पुतला दहन स्वतंत्रता के बाद लोकप्रिय हुआ।

  • दिल्ली: यहाँ 1953 से बड़े स्तर पर रामलीला मैदान में रावण दहन शुरू हुआ।

  • रांची: 1948 में पहली बार रावण पुतले का दहन हुआ।

  • अन्य क्षेत्र: धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे भारत में फैल गई और अब यह दशहरे का सबसे मुख्य आकर्षण बन चुकी है।

Why is Ravana burnt on Dussehra?
Why is Ravana burnt on Dussehra?

दशहरा क्यों मनाया जाता है?

(a) राम विजय की स्मृति

उत्तर भारत और पश्चिम भारत में दशहरा राम की विजय और रावण वध के कारण मनाया जाता है।

(b) दुर्गा विजय

पूर्वी भारत (बंगाल, असम, ओडिशा) और दक्षिण भारत में इसे दुर्गा पूजा का समापन दिवस माना जाता है, जब देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था।

(c) अर्जुन का शस्त्र पुनः प्राप्त करना

महाभारत में अर्जुन ने इस दिन शमी वृक्ष से अपने शस्त्र प्राप्त किए थे। इस कारण इसे शस्त्र पूजा और विजय मुहूर्त के रूप में भी महत्व प्राप्त है।

 रामलीला और दशहरा

रामलीला, दशहरे का अभिन्न हिस्सा है।

  • यह 16वीं शताब्दी में तुलसीदास की “रामचरितमानस” से प्रेरित होकर शुरू हुई।
  • मुगल काल से लेकर आज तक, रामलीला एक सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन है, जो लाखों लोगों को रामकथा से जोड़ता है।
  • दिल्ली का रामलीला मैदान, वाराणसी, अयोध्या, बरेली और मथुरा अपनी भव्य रामलीलाओं के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।
Why is Ravana burnt on Dussehra?
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विभिन्न राज्यों में दशहरे की परंपराएँ

  • उत्तर भारत: रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन।
  • महाराष्ट्र: शमी वृक्ष की पूजा और अपराजिता देवी की आराधना।
  • गुजरात: गरबा और डांडिया के साथ नवरात्रि का समापन।
  • कर्नाटक (मैसूर दशहरा): चमुण्डेश्वरी देवी की भव्य शोभायात्रा और जंबूसवारी।
  • पश्चिम बंगाल: दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन, जिसे ‘विजया दशमी’ कहते हैं।

 आधुनिक समय और पर्यावरणीय दृष्टिकोण

पहले रावण पुतले पटाखों और बांस-लकड़ी से बनाए जाते थे, लेकिन अब पर्यावरण की दृष्टि से कई स्थानों पर इको-फ्रेंडली रावण पुतले बनाए जाते हैं।

  • इसमें कागज, मिट्टी और बायोडिग्रेडेबल सामग्री का प्रयोग होता है।
  • कई जगह प्रतीकात्मक दहन ही किया जाता है ताकि प्रदूषण कम हो।

 दशहरे का आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश

  • यह हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी बुराइयाँ क्यों न हों, सद्गुण और धर्म की विजय निश्चित है।
  • यह पर्व हमें अपने भीतर के “रावण” को जलाने और आत्मशुद्धि करने का अवसर देता है।
  • सामाजिक रूप से यह पर्व एकता, उत्साह और परंपरा का प्रतीक है।

2025 का दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा। रावण दहन की परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक है। यह हमें यह संदेश देता है कि धर्म, सत्य और न्याय की हमेशा विजय होती है और अधर्म का अंत निश्चित है।

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