अनंत चतुर्दशी से लेकर नवरात्रि तक, सितंबर महीने में मनाए जाएंगे ये व्रत-त्योहार

Editorial Team
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September 2025 Hindu festivals

सप्तंबर 2025 का महीना हिंदू धर्म में आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विविधता से भरा है। इस दौरान विभिन्न त्योहार मनाए जाते हैं – कुछ धार्मिक आस्था से जुड़े, तो कुछ पारिवारिक और सामाजिक समरसता के प्रतीक। इस ब्लॉग में हम प्रमुख त्योहारों की तिथियाँ, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता समझेंगे।

प्रमुख त्योहार और व्रत-व्यापक परिचय

1. ओणम (Onam) – 5 सितंबर 2025

केरल का प्रमुख फसल उत्सव, जिसे ‘थिरुवोनम’ के रूप में मनाया जाता है। पुष्पांजलि, पुक्कलम (फूलों का रंग-बिरंगा डिजाइन), वसंतविन्यास नृत्य (Kathakali), बैल प्रतियोगिताएं व पनाड़ (भोजन) इसकी विशेषता हैं। यह राजा महाबली की भूमि पर लौटने की कथा से जुड़ा है, जब सबके जीवन में समृद्धि आती है।

2. गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan) – 6 सितंबर 2025

गणेश चतुर्थी का अंतिम दिन-जब गणपति बप्पा की मूर्ति को पानी में विसर्जित किया जाता है। यह जीवन के चक्र, मोक्ष और पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है।

3. अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) – 6 सितंबर 2025

इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप चतुर्दशनाग की पूजा की जाती है। श्रृद्धा एवं रक्षा की कामना के साथ यह व्रत किया जाता है।

Pitru Paksha
Pitru Paksha

4. पितृ पक्ष (Pitru Paksha / श्राद्ध) – 7–21 सितंबर 2025

इसे पितरों के प्रति श्रद्धा जताने का पर्व माना जाता है, जिसमें तर्पण और पिंडदान की जाती हैं, ताकि departed आत्माओं को शांति और आशीर्वाद मिलें।

5. विश्वरूपकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja) – 17 सितंबर 2025

भगवान विश्वकर्मा हिंदू धर्म के दिव्य वास्तुकार-को समर्पित यह व्रत, विशेषकर शिल्पकार, इंजीनियर, कार्मिकों द्वारा मनाया जाता है। इसमें औजार, मशीनरी और निर्माण कार्य की पूजा की जाती है। यह श्रम और कौशल का सम्मान है।

6. शारदीय नवरात्रि (Sharadiya Navratri) – 22 सितंबर से 1 अक्टूबर 2025

नवरात्रि की सबसे प्रमुख छः, जिसमें देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, व्रत, भजन-किर्तन, गरबा-नृत्य (गुजरात), और युगांडा (पश्चिम बंगाल) की पंडाल संस्कृति शामिल है। भव्य पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

7. दुर्गा पूजा (Durga Puja) – 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025

विशेष रूप से बंगाल और पूर्वोत्तर में मनाई जाने वाली यह दस दिवसीय उत्सव-विघ्नहरिणी देवी दुर्गा की महिषासुर वध की जयन्ती-से जुड़ा है। भक्त शस्त्र पूजा, भव्य पंडाल दर्शन, सांस्कृतिक नृत्य-नाट्य आदि करते हैं।

8. विजयदशमी (Vijayadashami) – 2 अक्टूबर 2025

नवरात्रि और दुर्गा पूजा का समापन-अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक। विभिन्न क्षेत्रों में यह रावण दहन (उत्तरी-पूर्व में), देवी पूजन (पूर्व में) या रामलीला का समापन (उत्तर भारत) के रूप में मनाया जाता है।

त्योहारों का सारणीबद्ध विवरण

त्योहार तिथि (2025)
ओणम 5 सितंबर
गणेश विसर्जन 6 सितंबर
अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर
पितृ पक्ष (श्राद्ध) 7 – 21 सितंबर
विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर
शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर – 2 अक्टूबर
दुर्गा पूजा 28 सितंबर – 2 अक्टूबर
विजयदशमी 2 अक्टूबर

प्रत्येक त्योहार का महत्व

ओणम: यह फसल और भाईचारे का उत्सव है। राज्य को सजाने और लोक-साहित्य, लोक-नृत्य (काट्टकली, पालीकीली) से परंपरा जीवंत होती है।

गणेश विसर्जन: गणेश-बाधा-निवारक हेतु-उनकी मूर्ति का विसर्जन जीवन के क्षणिक और पारलौकिक तत्व को दर्शाता है।

अनंत चतुर्दशी: विष्णु की अनंतता में आत्म-समर्पण। चतुर्दशनाग का व्रत दिव्य संरक्षा का विश्वास देती है।

पितृ पक्ष (श्राद्ध): पूर्वजों की आत्माओं की शांति एवं आशीर्वाद हेतु यह पवित्र परंपरा चलती आ रही है।

विश्वकर्मा पूजा: आधुनिक समाज में श्रम, तकनीक, निर्माण व कौशल को श्रद्धा का प्रतीक। औजारों का पूजन भारतीय श्रमिक संस्कृति में सम्मान दर्शाता है।

नवरात्रि: देवी शक्ति का उत्सव-आत्मशक्ति, नारीशक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संतुलन और उत्सव।

दुर्गा पूजा: बुराई पर अच्छाई की विजय-महिषासुर वध और लोक एकता का उत्सव। यह भक्तों में उत्साह, सौंदर्य, कला, सांस्कृति का मेल है।

विजयदशमी: नवरात्रि का समापन और रावण वध के संदर्भ में रामलिला का अंत। बुराई पर अच्छाई का प्रतीक, साथ ही दिवाली की शुरुआत का संकेत।

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