विश्वकर्मा पूजा हर वर्ष कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। इसे श्रम और कौशल का पर्व माना जाता है। इस दिन कारीगर, इंजीनियर, श्रमिक, किसान और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोग अपने औजारों, मशीनों और कार्यस्थलों की विशेष पूजा करते हैं। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की आराधना करने से कार्य में सफलता, दुर्घटनाओं से रक्षा और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
लेकिन इस दिन कुछ निषेध (Do’s & Don’ts) और उपाय भी बताए गए हैं जिन्हें मानना शुभ माना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं।
विश्वकर्मा पूजा के दिन क्या करें
1. मशीनों और औजारों की पूजा
इस दिन अपने औजारों, मशीनों, वाहनों और कार्यस्थलों की सफाई कर उन्हें पूजा स्थल पर रखा जाता है। उन पर हल्दी, रोली, फूल और चंदन का तिलक किया जाता है और “ॐ विश्वकर्माय नमः” मंत्र का जाप करते हुए पूजन किया जाता है।
2. दान और धर्मकर्म
दान का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या आर्थिक सहायता देने से भगवान विश्वकर्मा प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

3. कार्यस्थल की सजावट और सफाई
कर्म को ही पूजा मानने वाले भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हुए, इस दिन कार्यस्थलों और घरों को सजाया जाता है। साफ-सफाई करने से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।
4. मंत्रोच्चारण और आरती
पूजा के समय भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए निम्न मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है:
“ॐ विश्वकर्माय नमः”
साथ ही आरती और प्रसाद वितरण से पूजा पूर्ण होती है।
विश्वकर्मा पूजा के दिन क्या न करें
1. मशीनों और औजारों का प्रयोग न करें
पूरे दिन औजारों और मशीनों का इस्तेमाल वर्जित माना जाता है। इन्हें पूजा कर विश्राम दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन औजारों का उपयोग करने से अशुभ फल प्राप्त होता है और कार्य में रुकावटें आती हैं।
2. नकारात्मक सोच और वाणी से बचें
इस दिन विवाद, क्रोध और कटु वाणी का प्रयोग करने से बचना चाहिए। नकारात्मक ऊर्जा भगवान विश्वकर्मा की कृपा को कम कर देती है।
3. आलस्य न करें
यह दिन कर्म और परिश्रम का प्रतीक है, इसलिए अत्यधिक आलस्य या काम टालने की आदत को अशुभ माना जाता है।
4. अपवित्र वस्तुओं का प्रयोग न करें
मांसाहार, शराब और नशे का सेवन इस दिन पूर्णतया वर्जित है। यह दिन सात्विकता और शुद्धता का पर्व है।
सकारात्मकता बढ़ाने के उपाय
- कलश स्थापना – पूजा स्थल पर कलश स्थापना करने से घर और कार्यस्थल में स्थिरता और शांति आती है।
- दीप प्रज्ज्वलन – दीपक जलाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- कन्याओं और श्रमिकों का सम्मान – इस दिन छोटे बच्चों, कन्याओं और श्रमिक वर्ग का सम्मान करना शुभ माना गया है।
- भजन-कीर्तन – पूजा के बाद भक्ति गीत और भजन गाने से घर में सुख-समृद्धि और आनंद का वातावरण बनता है।
शुभ कार्य
- नए प्रोजेक्ट या काम की शुरुआत करना।
- व्यापार, फैक्ट्री या दुकान में नए उपकरण लाना।
- मशीनों और वाहनों का शुद्धिकरण व रख-रखाव करना।
- कारीगर और श्रमिकों का सम्मान करना।
विश्वकर्मा पूजा केवल पूजा का अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह परिश्रम, कौशल और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव है। इस दिन औजारों को विश्राम देना, दान करना, सात्विक आहार लेना और नकारात्मकता से दूर रहना जीवन में शुभता और सफलता का मार्ग खोलता है।
इसलिए, इस दिन बताए गए क्या करें और क्या न करें का पालन करना हर व्यक्ति के लिए लाभकारी है।